निर्वाचन क्षेत्र में

संसदीय जीवन की शुरूआत के साथ जब कमलनाथ छिंदवाड़ा के ग्रामों में किसानों से रूबरू होते थे तब वे उनसे उनकी खेती किसानी के बारे में चर्चा करते हुए कौन सी फसल बोई है? पूछते थे तो किसानों के द्वारा बड़े ही सहजता से जबाव दिया जाता था कि कोदो, कुटकी, जगनी, मक्का, ज्वार और क्या! तब कमलनाथ पूछते थे कि कितना उगा लेते हो?

तो किसानों का जबाब होता था। बस परिवार के गुजर बसर लायक हो जाता है और तब कमलनाथ उन्हें सलाह देते कि आप लोगों को नगद फसल की बुआई करना चाहिए तो किसानों की उत्सुकता और बढ़ जाती कि कौन सी नगर फसल है? तब कमलनाथ उन्हें सोयाबीन की जानकारी देते ओर बताते कि सोयाबीन की मांग न केवल देश में खाद्य तेल के लिए है बल्कि विदेशों में इसकी खली की बहुत मांग हैं, और जिस फसल की मांग देश विदेशों में है, उसकी बिक्री तो घर बैठे हो जाया करेगी। तो हुई न यह नगद फसल!

अपने युवा सांसद की सीख का जिले के किसान भाईयों पर यह असर हुआ कि हर तरफ सोयाबीन की फसल लगाने की होड़ मच गई तथा सन् 1985 -86 में जहां सोयाबीन की वार्षिक औसत आवक 1 लाख 22 हजार 769 क्ंिवटल पर आ गई और सन् 1991 -92 में बढ़ कर इसकी वार्षिक औसत 5 लाख 99 हजार 388 हो गई तथा जिला सोयाबीन उत्पादन में अग्रणी जिला हो गया। पर कमलनाथ यही आकर नहीं रूके उन्होंने किसानों की आर्थिक हालत सुधारने के लिए कृषि विभाग उद्यानिकी विभाग को जिले के गांव - गांव तक जाकर खेती को सुधारने उन्नत कृषि उपकरणों का उपयोग, कृषिकों को समझाने के लिए कृषि मेला प्रर्दशनी, गोष्ठियों का सिलसिला प्रारंभ करवाया जो आज तक जारी हैं।

यह कमलनाथ की मौलिक सोच थी कि मेरे जिले का किसान भी पंजाब और हरियाणा के किसानों की तरह खुशहाल हो, समृद्ध हो।

छिंदवाड़ा का सौंसर व पांढ़र्णा विकासखंड संतरा उत्पादक क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है, इस क्षेत्र के किसानों पर जब सन 1999 से लेकर सन 2002 तक लगातार सूखे की मार पड़ी तब किसानों के परिवारों के सामने भरण पोषण से लेकर संतरे के बगीचे तक को बचाने की समस्या आन खड़ी हुई थी किंतु बगीचा फसलों को नुकसान होने पर प्रदेश शासन से राहत राशि का प्रावधान राजस्व पुस्तिका में न होने से मुसीबत में फंसे किसानों को राहत दिलवाने के लिए कमलनाथ ने प्रदेश सरकार से विशेष अनुरोध किया। और प्रदेश में पहली बार बगीचे फसलों के सूखे से प्रभावित किसानों के लिए प्रदेश सरकार ने राहत राशि स्वीकृत की जिले की पांढुर्णा के 10 हजार किसानों के लिए 78 लाख रूपए मुख्यमंत्री के हस्ते कमलनाथ ने अपनी उपस्थिति में वितरित करवाए। तब से उद्यानिकी फसलों के किसानों के लिए राहत राशि का प्रावधान राजस्व संहिता में कर दिया गया है, जिसका श्रेय कमलनाथ को है।

जिले में जिला मुख्यालय से तहसील और तहसील से गांवों को जोड़ने वाली सड़कों को पक्की करने का जो अभियान सन 1981 में कमलनाथ ने प्रारंभ किया था। वह सन 2009 में चरम पर पहुंच गया था। तब तक कमलनाथ प्रधानमंत्री सड़क योजना केन्द्रीय सड़क निधि तथा अन्य कई मुद्दों से जिले में कई कच्ची सड़कों को पक्की सड़कों में परिर्वतित करवा चुके थे। गांव से गांव सड़कों को जोड़ने के लिए सन 2003-04 में प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत जिले की 304 किमी सड़क के लिए 54 करोड़ तो सन 2004-08 तक जिले की 242 सड़कों जिनकी लंबाई 1131 किमी है, के लिए 2 अरब 98 करोड़ 79 लाख रुपए स्वीकृत करवाए गए थे। तथा 2001-09 तक 24 बड़े रोड प्रोजेक्ट के लिए 2 अरब 16 करोड़ 34 लाख रूपए स्वीकृत करवाने का काम कमलनाथ ने किया था। इतना ही नहीं केन्द्र सरकार के अन्य संस्थानों क्रमश एन.टी.बी.सी. से 1 करोड़ 10 लाख रूपए से पांढुर्णा की 14, सौंसर की 16 व बिछुआ की 15 सड़कों का निर्माण करवाया गया। साथ ही केन्द्र से पिछड़ा क्षेत्र संग्रहित निधि से भी ग्रामीण इलाकों की आन्तरिक सड़कों के लिए करोड़ों की राशि स्वीकृति करवाई गई।

सन 2009 के लोकसभा चुनावों में अपनी जीत का परंपरा को कायम रखते हुए कमलनाथ लोकसभा के लिए पुन: निर्वाचित हुए तथा केंद्र में पुन: संप्रग सरकार का गठन हुआ। संप्रग-2 सरकार में कमलनाथ जी को राष्ट्रीय राजमार्ग व भूतल परिवहन मंत्रालय में मंत्री के रूप में सम्मिलित किया गया। यह कमलनाथ के नेतृत्व का कमाल है कि उन्हें जिस विभाग का भी दायित्व मिलता रहा है, उस विभाग के वे थोड़े समय में ही गतिशील कर देते है, राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग जो संप्रग-1 सरकार के पहले कार्यकाल में प्रतिदिन मात्र 2 किलोमीटर सड़क बना रहा था वहीं कमलनाथ के एक वर्ष के कार्यकाल के अंदर दस से तेरह किलोमीटर प्रतिदिन बनाने के स्तर पर पहुंच गया। यह इसलिए संभव हो पाया था क्योंकि कमलनाथ ने राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की इच्छुक कंपनियों के लिए बनाए गए कठोर नियमों को सरल बनाने के लिए संबंधित कमेटी के प्रस्ताव मंजूर करवा लिए थे। जिसका परिणाम था कि सन 2009-10 में लगभग 63 प्रोजेक्ट काम के लिए अवार्ड हो सकें। कमलनाथ इस मंत्रालय के प्रभार में 585 दिन तक ही रहे थे, किंतु इतने कम दिनों में न केवल मंत्रालय को उन्होंने गतिशील कर दिया बल्कि छिंदवाड़ा जिले में सड़कों के माध्यम से विकास के द्वार खोल दिया है।

कमलनाथ कितने दूरदर्शी है यह इसी से समझा जा सकता है कि दो राज्य स्तरीय मार्गो को राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में उन्नयन की स्वीकृति के साथ ही उन्हें इस बात का भी एहसास है कि मार्गो के विकास से भारी वाहनों के लगातार आवागमन के बोझ से छिंदवाड़ा नगर की यातायात प्रणाली चरमरा जाएगी, इसलिए छिंदवाड़ा नगर के आसपास 57 किमी के रिंग रोड के निर्माण की स्वीकृति कराई है, छिंदवाड़ा नगर के दोनों मार्गो के चौड़ीकरण के साथ रिंग रोड की संभावित लागत 1(एक) अरब 4 सौ 12 करोड़ रुपए है। देश के गिने चुने महानगरों के आस पास रेंग रोड की तरह छिंदवाड़ा में निर्मित यह रिंग रोड एक नए छिंदवाड़ा का विकास करेगा। जिसका लोकार्पण केन्द्रीय सड़क व परिवहन मंत्री आस्कर फर्नाडिस ने कमलनाथ की उपस्थिति में 25 फरवरी 2014 को किया।

केन्द्रीय सरकार कमलनाथ के प्रस्ताव को स्वीकार किया और राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) के लिए दो राज्य महामार्ग घोषित किए। य़े हैं

1) राष्ट्रीय राजमार्ग 547 नरसिंहपुर - Amarwada - Chhindawara - - सड़क और Savaner

2) एनएच -337 मुल्ताई - छिंदवाड़ा - सिवनी रोड प्रारंभ में ये राज्य महामार्ग थे, जिनकी चौड़ाई 5.5 से 7 मीटर थी। केन्द्रीय सरकार परियोजना शुरू कर दी है ताकि इन सड़कों को 10 मीटर चौड़े पैवड साल्ल्डर दो लेन राजमार्ग में परिवर्तित किया जा सके। यह परियोजना पूरी हो चुकी है और छिंदवाड़ा से नागपुर तक सड़क यात्रा का समय कम कर दिया गया है।

उसी समय भोपाल से नागपुर को जोड़ने वाले एनएच -69 के चार लेन सड़क विकास के अनुमोदन को मंजूरी दे दी गई थी। पांधर्न नगर शहर के लिए एक बाईपास सड़क भी योजना बनाई गई है। पंधुरना शहर जहाज को जोड़ने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा 5.38 करोड़ रुपये की लागत वाली दो पुलों का निर्माण किया गया। छिंदवाड़ा में ये तीन राष्ट्रीय राजमार्ग उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाला सबसे छोटा मार्ग है और शहर को एक जंक्शन बना दिया है।

काफी समय से सिवनी-नरसिंहपुर रोड रेलवे क्रॉसिंग के जंक्शन पर एक ओवर पुल का निर्माण करने की जनता की मांग थी। कमलनाथ ने इस ओवर ब्रिज की स्वीकृति सुनिश्चित की, साथ ही सोनी - नागपुर सेक्टर के सड़क विकास के साथ। कमलनाथ ने 25 फरवरी 2014 को इस ओवर ब्रिज का भी उद्घाटन किया।

1863 आबाद गांवों में पेयजल आपूर्ति
जिले के ग्रामीण इलाकों का दौरा करने के दौरान कमलनाथ जब ग्रामीण महिलाओं को दूर-दूर से सिर पर घघरे और कलशों में पानी लाते हुए देखते तो उनका मन द्रवित हो उठता था। तब छिंदवाड़ा के मात्र 40 गांव ही ऐसे थे जहां पीने के पानी की समस्या नहीं थी शेष 1863 आबाद ग्रामों में पानी की विकट समस्या थी। तब जिले के लोग जानते भी नहीं थे, कि पेयजल समस्या का निदान के लिए नलकूप खनन का कार्य भी सरकार के पीएचई विभाग द्वारा करवाया जाता है। क्योंकि इस विभाग की गतिविधियां तब जिले में शुन्य बराबर थी कारण जो भी रहे हो, किंतु कमलनाथ द्वारा केंद्र सरकार से विशेष पहल करके जब नलकूप खनन कार्य को छिंदवाड़ा के गांव-गांव में शुरू करवाया गया तो लोगों की आशाएं बढ़ने लगी कि हमारे यहां भी, आज नहीं तो कल हैंड पंप खुदेगा। नलकूप खनन का कार्य छिंदवाड़ा में सतत जारी रहा और सन 2003-04 तक 10015 हैडपंप स्थापित हो चुके थे। अर्थात आबाद गाम के मान से एक एक ग्राम में 5 व 6 हैडपंप स्थापित हुए थे। किंतु कमलनाथ जानते थे कि हैडपंप पानी के स्थायी हल नहीं है, जरूरत इस बात की है, कि हर गांव-गांव में पीने के पानी का एक स्थायी त्रोत हो। इसी उद्देश्य से जिले में तब तक 643 ग्रामीण नल जल योजनाएं आकार लेकर ग्राम पंचायतों को सौंपी जा चुकी थी।
     ग्राम के साथ छिंदवाड़ा के शहरी क्षेत्रों में भी पेयजल संकट के समाधान के लिए कमलनाथ ने समान रूप से कार्य करवाए, छिंदवाड़ा नगर के लिए कन्हरगांव जलाशय योजना क्रियान्वित की गई, इस योजना के प्रांरभ होने से छिंदवाड़ा के नागरिक गण भूल गए कि पेयजल जल संकट भी होता है। इसी के साथ जिले के सभी शहरों में पेयजल की आपूर्ति संतोषजनक हो सके इसके लिए सतत प्रयास चलते रहें।

2001 में 73 फीसदी आबादी को पेयजल आपूर्ति
जिले में सन 1980 तक मात्र 40 ग्रामों में पेयजल के संतोषजनक प्रबंध थे तो कमलनाथ के द्वार किए गए प्रयासों से 1991 तक जिले में सुरक्षित पेयजल तक पहुंच वाले परिवारों की संख्या 56.9 प्रतिशत तक पहुंची, और यह संख्या सन 2001 में 73.3 प्रतिशत तक पहुंच गई अर्थात जिले के तीन चौथाई परिवार सुरक्षित पेयजल तक पहुंच ने वाले परिवार बन गए थे।
     किंतु कमलनाथ का प्रयास शत-प्रतिशत परिवारों का था। और इसी का परिणाम था कि जब सन 2004 में केन्द्र में कांगेस नेतृत्व वाली सरकार में कमलनाथ पुन: मंत्री बने तो उन्होंने छिंदवाड़ा के विभिन्न शहरों की पेयजल समस्या की और ध्यान दिया तथा जिले की सड़कों के साथ इसके निराकरण पर ध्यान दिया।

छिंदवाड़ा जिले के नगरीय विकास के लिए स्वीकृत किये 464 करोड़
केंद्र सरकार में कमलनाथ जी ने जब शहरी विकास मंत्रालय का पदभार ग्रहण किया, तब उन्होंने छिंदवाड़ा के शहरी क्षेत्रों की समस्या मूलक वर्षो से लंबित पेयजल योजना सहित नव गठित नगरों के लिए भी धनराशि स्वीकृत करवाई।
जिनमें छिंदवाड़ा नगर के लिए 57 करोड़, पांढुर्णा 64 करोड़, डोंगर परासिया 30 करोड़, सौंसर 10 करोड़, चौरई 8 करोड़ पीपलानारायणवार के लिए 8 करोड़, अमरवाड़ा 16 करोड़, सौंसर 19 करोड़, जुन्नारदेव 24 करोड़, बड़कुही 12 करोड़, चांदामेटा 15 करोड़, दमुआ 14 करोड़, न्यूटन चिखली 10 करोड़, हर्रई 11 करोड़, मोहगां 11 करोड़ तथा लोधीखेड़ा को 9 करोड़ रूपए की योजना स्वीकृत की है।
साथ ही आन्तरिक सड़कों के लिए डोंगर परासिया 24 करोड़, पांढुर्णा 46 करोड़, अमरवाड़ा 4 करोड़, सौंसर 23 करोड़, पीपलानारायणवार 4 करोड़, जुन्नारदेव 3 करोड़, बड़कुही 5 करोड़, चांदामेटा 5 करोड़, दमुआ 14 करोड़, न्यूटन चिखली 8 करोड़, हर्रई 5 करोड़, मोहगांव 4 करोड़, चौरई 2 करोड़, एवं लोधीखेड़ा 4 करोड़ रूपयों की स्वीकृति दिलाई है।

नलकूप से सिंचाई एवं बिजली ने बदली किसानों की तकदीर
भगवान भरोसे खेती अर्थात केवल वर्षा आधारित खेती पर निर्भरता से अलग कमलनाथ ने जिले के किसानों को अपने पुरूषार्थ से आधुनिक संसाधनों के साथ मैत्री कर जमीन से पानी निकाल कर खेतों का हरा-भरा करने की प्रेरणा दी। यह इसलिए भी संभव हो सका था क्योंकि जिले के ग्रामीण इलाकों में तब तक बिजली खेतों तक पहुंच चुकी थी और परंपरागत कुओं को खुदवा कर उसमें बिजली पंप लगावाने से ज्यादा सुरक्षित व बचत वाला साधन था। खेतों में नलकूप खुदवाना, कमलनाथ के सुझाव को किसानों ने हाथों हाथ लिया। जिसके फलस्वरूप जिले में नलकूपों से सिंचाई का दौर प्रारंभ हुआ। और सन 1990-91 तक जिले में 163 नलकूपों की संख्या 1235 हैक्टेयर में सिंचाई होने लगी थी। तथा 2004 तक नलकूपों की संख्या 4521 तक हो गई। जिसके माध्यम से 19331 हैक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई की जाने लगी थी। वहीं सन 2010-11 में नलकूपों की संख्या 10166 हो गई जिससे 32117 हैक्टेयर क्षेत्र सिंचित किया जा रहा था। तथा 2013 तक 51456 हैक्टेयर क्षेत्र में नलकूप से सिंचाई होने लगी थी।
कमलनाथ द्वारा जिले के किसानों को उन्नत कृषि के लिए प्रोत्साहित किए जाने से जिले के किसानों ने अपने खेत-खलिहानों को सुधारने का भी उत्साह जागा, और जिले के किसानों ने सिंचाई के लिए खुद के कुंए खुदवाने की होड़ सी लग गई। 1980 तक जिले में 46911 कुंए थे जिनसे 42616 हैक्टेयर सिंचाई होती थी। वही सन 1990 तक 59288 कुएं से 59769 हैक्टेयर खेतों में सिंचाई हेने लगी थी। तथा 2003-04 तक जिले में 80045 कुओं से 83770 हैक्टेयर खेती में सिंचाई होने लगी थी। इधर 2010-11 तक कुआंð का खनन बढ़ कर 93265 हो गया जिनसे 99605 हैक्टेयर क्षेत्र सिंचित होने लगे है।
उपरोक्त आंकड़ों पर यदि सरसरी तौर पर नजर डाले तो यह साफ दिखाई देता है कि सन 80 तक कुओं से सिंचाई का प्रतिशत प्रति कुआं एक हैक्टेयर से भी कम था, किंतु कमलनाथ के आगमन के बाद के दशक में अर्थात 90 के दशक में यह बढ़कर एक हैक्टेयर से कुछ ज्यादा हो गई। तथा कमलनाथ के संसदीय कार्यकाल के दूसरे दशक में बढ़ कर प्रति कुआं सिंचाई क्षमता 1.41 प्रति हैक्टेयर हो गई थी।

सन् 1980 में जब केन्द्र में कांग्रेस की सरकार ने कार्य करना शुरू किया। तब केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय के माध्यम से छिंदवाड़ा को सम्पूर्ण विद्युतीकरण की एक मुश्त योजना में सम्मिलित करवाया। सन् 1980 में देश के जिन चार क्षेत्रों को इस योजना में सम्मिलित किया गया था उसमें छिंदवाड़ा के अलावा रायबरेली व मेढक (इंदिरा जी) अमेठी (संजय गांधी) तथा मालदा (तत्कालीन उर्जा मंत्री) के संसदीय क्षेत्र थे।
जिले में 1979 - 80 तक 43.47 प्रतिशत ग्रामों का ही विद्युतीकरण हुआ था, वही 1984 तक जिले के 1984 ग्रामों में से 1874 ग्रामों का विद्युतीकरण हो गया था अर्थात केवल 110 ग्राम ही शेष रह गये थे वो भी ऐसे ग्राम थे जो भौगोलिक विषमताओं के कारण रूक गये उनमें से 2003 तक बारह ग्रामों का और विद्युतीकरण हो जाने से कुल विद्युतीकृत ग्रामों की संख्या 1896 हो गई थी। और शेष 88 ग्रामो सहित जिले में तेजी से बढ़ रही विद्युत की मांग के कारण वोल्टेज समस्या भी बढ़ने लगी थी इन समस्याओं का निराकरण करने के लिए कमलनाथ द्वारा जिले के सुदूर अंचलों में कई विभिन्न क्षमताओं वाले विद्युत उप केन्दों की स्थापना तो करवाई गई वहीं सन् 2006 में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना को छिंदवाड़ा में लागू करवाया। इस योजना के अंतर्गत ग्रामों में विद्युतीकरण प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रत्येक योजना पर 90 प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में उपलब्ध करवाई गई हैं।
35 साल पहले कमलनाथ ने संपूर्ण विद्युतीकरण योजना जिले में क्रियान्वित करवा कर अपनी दूरदर्शिता का आभास उसी समय करा दिया था, यही कारण है कि जहां देश और प्रदेश के अनेक क्षेत्र उजाले के लिए तरस रहे हैं वही छिंदवाड़ा में वोल्टेज की समस्या के समाधान के लिए कार्य प्रारंभ हो चुके हैं साथ ही ग्रामों के टोले मजरे में बिजली की पुख्ता व्यवस्था बनाने का कार्य किया जा रहा हैं।

जिले के औद्योगीकरण के लिए कमलनाथ ने एक राजनेता के रूप में नहीं बल्कि एक धरती-पुत्र के रूप में अपनी अग्रिम सोच को ध्यान में रखते हुए उसे क्रियांवित किया, चाहे कितनी भी बड़े रसूखदार या कंपनी हो उसे कारखाना खोलने के लिए छिंदवाड़ा नगर या जिले के किसी भी नगरीय क्षेत्र से सटे हुए इलाकों में कारखाना खोलने के लिए जमीन खरीदने की बजाए उन्हें शहरी इलाकों से कम से कम 5-7 किलोमीटर दूर कारखाना स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके पीछे कमलनाथ की यही मंशा थी कि कारखाने के माध्यम से कम से कम शहर का विस्तार तो हो, तथा कारखाने के कारण होने वाले प्रदूषण का शहर पर प्रभाव न पड़े। इसी वजह से जब पहला बड़ा उद्योग सन 1984 में बहु राष्ट्रीय कंपनी हिंदुस्तान लीवर ने स्थापित किया तो वह छिंदवाड़ा-नरसिंहपुर मार्ग पर छिंदवाड़ा शहर से 8 किलोमीटर दूर ग्राम लहगडुआ में प्रारंभ करवाया। 1984 में औद्योगिक निवेश का जो सिलसिला प्रारंभ हुआ उसे गति देने के लिए कमलनाथ ने नागपुर सीमा से लगे हुए जिले के सौंसर विकासखंड के खैरी तायगांव ग्राम में औद्योगिक विकास निगम के माध्यम से उद्योगों के लिए जमीन आरक्षित करवाई, यहां भी कमलनाथ की दूरदर्शिता का परिचय मिलता है। जिन्होंने नागपुर के हवाई अड्डे का लाभ उठाने तथा महानगर के रास्ते जिले के औद्योगीकरण के लिए उद्योगपतियों को नजदीकी क्षेत्र में आने का आमंत्रण दिया। और इसका परिणाम भी सन 1990 के बाद मिलने लगे और अनेक कारखाने उस दौरान जिले में स्थापित हुए।


  नाम उत्पाद निवेश (लाखों में) शुरुआत वर्त्तमान स्तिथि
1 Suryavanshi Mill Cotton Fabric 3243.10 1991 चालू
2 Raymond Mill Fabrics 20459.00 1991 चालू
3 Croworth India Pharmaceutical 1225.65 1992 बंद
4 MP State Fed Soyabean oil 1805.00 1991 बंद
5 PBM Ploytech Cotton Fabric 3772.78 1992 चालू
6 Prizm Solvent Soyabean oil 1200.00 1990 बंद
7 Vindhyachal Synthetic Fabrics 0173.83 1994 बंद
8 Hanuman Chromo Paper 0342.86 1993 चालू
9 Hindustan Lever Detergent Soap 0960.00 1984 चालू
10 Dry Tech Process Powder 0257.00 1994 चालू
11 Nikit Industries Oxygen Gas 0395.00 1991 चालू
12 Bhansali Eng. Polymer 0131.45 1990 चालू
13 Super Pack Bardana 0622.84 1987 बंद
14 PM Ply Plywood   1983 बंद
15 Sevan Plastic Woven Sacs 0200.00 1986 बंद
16 Thomas Industries Soya Oil 0478.95 1987 बंद
17 Britannia Toast / Biscuit 300.00 2009 चालू
18 Shahi Garments Shirts   2013 चालू

बुनियादी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा के नये-नये संस्थान
कमलनाथ जब 1980 में सांसद बने तब छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय में उच्च शिक्षा के नाम पर मात्र एक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दो निजी महाविद्यालय थे। तकनीकी शिक्षा के नाम पर केवल एक पॉलीटेक्निक कॉलेज खिरसाडोह में था। तब जिले के विभिन्न विकासखंडों में केवल हाई स्कूल तक शिक्षा की व्यवस्था थी। जिले के ग्रामीण अंचलों के छात्र अपनी उच्च शिक्षा के लिए छिंदवाड़ा आया करते थे। कमलनाथ ने 80 के दशक में इस दिशा में सतत प्रयास कर जिले के 11 में से 9 विकासखंडों में न केवल महाविद्यालय खुलवाए, बल्कि पांढुर्णा व सौंसर में विज्ञान महाविद्यालय खुलवाए। विकासखंड मुख्यालय से इतर लोधीखेड़ा व दमुआ में भी उनके प्रयासों से ही शासकीय महाविद्यालय संचालित हो रहे है। इतना ही नहीं छिंदवाड़ा शासकीय स्नातकोतर महाविद्यालय में विधि संकाय तथा कन्या महाविद्यालय भी कमलनाथ के प्रयासों से ही प्रारंभ हो सके थे। 1980 में छिंदवाड़ा में प्राथमिक शाला बालकों की 1387 व 58 बालिकाओं की, मिडिल स्कूल 192 बालकों के तो 30 बालिकाओं के तथा 51 बालक व केवल 7 गर्ल्स हायर सेंकेडरी स्कूल ही शिक्षा विभाग द्वारा संचालित किए जा रहे थे। तब बुनियादी रूप से शिक्षा का प्रचार प्रसार बढ़ाने के लिए कमलनाथ ने व्यक्तिगत रूप से ध्यान दिया। जिसका परिणाम यह हुआ कि सन 2003-04 तक छिंदवाड़ा में प्राथमिक शालाओं की संख्या2834 मिडिल स्कूल 865 और 10वीं तक के हाईस्कूल 143 व 191 हायर सैकेंडरी स्कूलों की हो चुकी थी। तात्पर्य यह है कि सन 2003-04 तक जिले के हर गांव में प्रायमरी स्कूल, हर दो गांवों के बीच मिडिल स्कूल तथा हर छह गांवों के बीच एक हाई स्कूल या हायर सैंकेडरी स्कूल संचालित होने लगा था। इसी तरह जिले में 80 में सिर्फ 4 कॉलेज थे वे बढ़कर 17 हो गए है।

केन्द्रीय शिक्षा संगठनों द्वारा संचालित स्कूलों की शाखाएं
सन 1980 में जब कमलनाथ जी सांसद बने थे, तब केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा कोल मांइस के कारण केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों के लिए बड़कुही में एक मात्र सेंट्रल स्कूल संचालित हो रहा था। सी.बी.एस.ई. पैटर्न से उस स्कूल में पढ़ाई होने से राज्य सरकार के कर्मचारियों की तथा आम नागरिकों की भी यह चाहत थी कि उनके बच्चे भी सेंट्रल स्कूल फिर चौरई व जुन्नारदेव में तथा पांढुर्णा में भी सेंट्रल स्कूल की शाखा खुलवाने की स्वीकृ मानव संसाधन मंत्रालय से दिलवा दी है। इस तरह छिंदवाड़ा जिला देश में एक मात्र ऐसा जिला बन गया है जहां 6-6 सेंट्रल स्कूल संचालित हो रहे है।

किंतु कमलनाथ यहीं नहीं रूके उन्होंने मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा संचालित आवासीय स्कूल नवोदय विद्यालय का सिंगोड़ी अमरवाड़ा विकास खंड में तथा सन 2005 में जुन्नारदेव के उमरिया ग्राम में और बाद में 2009 सिंगारदीप बिछुआ में एकलव्य आवासीय विद्यालयों की शुरूआत करवाई। यह स्कूल आदिवासी वर्ग के विद्यार्थियों को सीबीएसई पैटर्न से शिक्षा उपलब्ध कराती है।

तथा सन 2006 में जिले के आठ अर्ध शहरी क्षेत्रों हर्रई, कपरवाड़ी, चौरई, पौनार, तामिया, दमुआ, मोरडोंगरी व खमारपानी में कस्तूरबा बालिका विद्यालयों को विशेष कर आदिवासी बालिकाओं के अध्ययन हेतु प्रारंभ करवाया। इसी कड़ी में महिला पॉली टेकनिक विद्यालय भी छिंदवाड़ा में खुलवाया।

इस तरह केंद्र सरकार का मानव संसाधन मंत्रालय हो या आदिम जाति मंत्रालय हो जो भी स्कूल इन मंत्रालयें द्वारा संचालित किए जाते है, छिंदवाड़ा में लाने कार्य कमलनाथ ने किया है।

यह कमलनाथ की खासियत है कि वे अपने छिंदवाड़ा के एक एक गांव को भली भांति से जानते है तभी उन्होंने कें द्र से शिक्षा के लिए जितने स्कूल स्वीकृत करवाए उन्हें जिले के हर विकासखंड के दूरदराज के इलाकों में स्थापित व संचालित करवाया। ताकि जिले का कोना कोना शिक्षा के प्रचार-प्रसार का माध्यम बने तथा वह स्कूल उस क्षेत्र के विकास का रास्ता खोलने में मददगार बने।

पीएमटी व पीईटी का परीक्षा केंद्र छिंदवाड़ा में
मेडिकल एवं इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए होने वाली परीक्षा के केंद्र सन 97 के पहिले राजधानी या संभागीय मुख्यालयों में ही हुआ करते थे। जिले के विद्यार्थियों को कई कई दिन परीक्षा की कोचिंग तथा परीक्षा के लिए किराए से कमरे लेकर रहना पड़ता था, पालकों को काफी आथिक भार पड़ता था।

विषेश कर छात्राओं को लेकर पालकों में काफी तनाव रहता था। तब कमलनाथ जी ने राज्य सरकार के समक्ष यह विषय बड़ी वजनदारी से उठाया और आग्रह किया कि जिला मुख्यालयों पर भी परीक्षा केंद्र बनाए जाए। फलस्वरूप छिंदवाड़ा सहित प्रदेश के कई जिला मुख्यालयों में पीएमटी, पीइटी परीक्षा केंद्र बन गए। परीक्षार्थियें को तनावमुक्त होकर अपने गृह नगर में ही परीक्षा देने के अवसर खुल गए।

नौनिहालों को नि:शुल्क कोंचिग
छिंदवाड़ा की नन्ही पीढ़ी न केवल साक्षर हो बल्कि उन कमजोरियों पर भी विजय प्राप्त करे, (अंग्रेजी, गणित, व विज्ञान) जो उनके आगे के विद्यार्थी जीवन को बढ़ने से रोकते है। इस बात को ध्यान में रखकर कमलनाथ ने 5 सिंतबर 2010 शिक्षक दिवस से जिले में ‘नॉलेज पांइट’ की शुरूआत करवाई। यह नॉलेज पांइट तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय युवाओं की देखरेख में बिना किसी सरकारी सहायता के प्रारंभ करवाए गए। इन नॉलेज पांइट सेंटर में कक्षा 6वीं से दसवीं तक के बच्चों को प्रवेश देकर मुफ्त टय़ूशन दी जा रही है साथ ही स्टेडी मटेरियल भी दिया जाता है। और तो और बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाइयां भी दी जाती है।

जिले के सौंसर विकासखंड मुख्यालय से शुरू हुए पहले नॉलेज पांइट से 2010 में 20 केंद्रों में 4200 बच्चे सन 2011 में 12 केंद्रों में 11410 तथा 2012-13 में 9105 बच्चों ने अध्ययन के लिए नाम दर्ज कराया। अपनी तरह के अनूठे नॉलेज सेंटरों में मात्र 20 रूपए प्रति माह फीस ली जाती है। समाज के आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चे अकसर पैसों की कमी के कारण कोंचिग कक्षाओं में प्रवेश नहीं ले पाते, इसलिए कमलनाथ जी ने उन्हें अपने आसपास ही विशेष विषयों पर कोंचिग मिल सकें, इसका प्रबंध निजी क्षेत्र के स्वयं सेवियों के माध्यम से किया है। और यह भी प्रयास किया है कि उन्हें छोटी सी उम्र में उनको उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी किया जाए, तभी व्यसन लगने की उम्र में नॉलेज सेंटर नशा मुक्ति अभियान चलाकर जहां लोगों में जागरूकता ला रहा है, वही बच्चों को भी हर प्रकार के नशे से दूर रहने की आदत में ढाल रहा है।
जिले के सभी केंद्र ऑनलाइन कर दिए गए है।

छिंदवाड़ा बना एजुकेशन हब
व्यवसायी शिक्षा संस्थान छिंदवाड़ा में खोलने के लिए कमलनाथ के प्रयास से जिले के नागरिकों को अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए यह कामना शुरू हो रही थीं कि काश उनके जिले में भी इंजीनियरिंग कॉलेज होता तो कम से कम उनके बच्चों को इंजीनियरिंग की शिक्षा के लिए बाहर तो नहीं जाना पड़ता। किंतु मध्यप्रदेश में 80-90 के दशक में शासकी इंजीनियरिंग कॉलेज गिने-चुने ही थे। आñर उनमें प्रवेश के लिए भी पीइटी की परीक्षा प्रदेश स्तर पर देनी पड़ती थी।

जिले में दो-दो इंजीनियरिंग कॉलेज लाने का श्रेय कमलनाथ को
परंतु सन 1991 के बाद आर्थिक उदारीकरण का युग प्रारंभ होने से तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में भी निजी क्षेत्र की संस्थानों ने प्रवेश किया और विगत 20 वर्षो में न केवल निजी क्षेत्र के इंजीनियरिंग के कॉलेज सफलतापूर्वक संचालित हो रहे है, बल्कि इनकी यूनिविर्सिटी भी बन गई है, जो इन कॉलेजों का संचालन कुशलतापूर्वक कर रहे है। ऐसे ही राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त संस्थान जयप्रकाश सेवा संस्थान के संचालक तथा जेपी ग्रुप के चेयरमेन श्री मनोज गौर से कमलनाथ जी ने 2009 में अनुरोध किया की छिंदवाड़ा में तकनीकी शिक्षा के प्रसार के लिए वे उनकी सेवा संस्थान की ओर से इंजीनियरिंग कॉलेज प्रांरभ करवाए।
तब जेपी सेवा संस्थान ने छिंदवाड़ा में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की योजना बनाई तथा छिंदवाड़ा विकासखंड के ग्राम नेर में 52 एकड़ भूमि खरीद कर लगभग 60 करोड़ की लागत से एक आधुनिक सुसज्जित प्रयोगशाला तथा पुस्तकालय के साथ विशाल भवन बनाने की कार्य योजना पर कार्य शुरू किया। कॉलेज निर्माण का भूमि पूजन कमलनाथ जी ने 5 अक्टूबर 2011 को किया है।वहीं इसके पूर्व एक अन्य निजी संस्थान द्वारा जिले के मोहखेड़ विकासखंड के ग्राम खैरवाड़ा-थुनिया में ऐनी इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम से इंजीनियरिंग कॉलेज बनाया गया है जो इसी 2014 सत्र से प्रारंभ हो जाएगा।

फैशन एवं रोजगार को नये-नये अवसर
रेडीमेड और गारमेंटस के क्षेत्र में अपने हुनर के माध्यम रोजगार पाने के लिए युवाओं को पहले महानगरों में वहां के इंस्टीटय़ूट में प्रवेश के लिए कई तरह के पापड़ बेलने पड़ते थे, परंतु कमलनाथ ने इस नई विद्या से युवाओं को रोजगार पाने के लिए छिंदवाड़ा में ही अपैरल ट्रेनिंग डिजाइन सेंटर प्रारंभ करवा दिया इस इंस्टीटय़ूट का छिंदवाड़ा में 31 जनवरी 2008 को कमलनाथ जी ने शुरूआत की थी।
अपैरल इंस्टीटय़ूट के द्वारा जो कोर्स संचालित किए जा रहे है उसमें प्रशिक्षित होकर 709 विद्यार्थीगण सन 2010 जनवरी तक अनेक गारमेंटस बनाने वाले कंपनियों में रोजगार प्राप्त कर चुके थे तो वही जुलाई 2011 तक 405 विद्यार्थियों को रोजगार मिला, इसमें से 55 युवाओं को छिंदवाड़ा में प्रारंभ एक फैक्टरी में रोजगार मिला है। तथा 2013 तक 2000 प्रशिक्षु प्रदेश व देश में रोजगार प्राप्त कर चुके है।
अपैरल इंस्टीटय़ूट अब इमलीखेड़ा में अपने नए भवन में संचालित होने लगा है। अपैरल अमरवाड़ा तहसील मुख्यालय में एक शाखा भी संचालित कर रहा है। जहां छोटी अवधि वाले कोर्स संचालित हो रहे है। और 8 मार्च 2014 से इसकी शाखा पांढुर्णा में भी खुलने वाली है।

देश का छंटवां फुटवियर डिजाइन डेवलपमेंट इंस्टीटय़ूट छिंदवाड़ा में
उद्योग में वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत सन 1986 में फुटवियर डिजाइन एण्ड डेवलपमेंट इंस्टीटय़ूट की स्थापना होने के बाद पूरे देश में अभी तक कुल सात इंस्टीटय़ूट ही संचालित हो रहे है। छिंदवाड़ा में स्थापित एफ.डी.डी.आई. का नंबर छंटवा है, अन्य पांच में से एक नोयडा में दूसरा कोलकत्ता में तीसरा चैन्नई में चौथा रायबरेली में पांचवा रोहतक में है। तथा छिंदवाड़ा में छंटवां तथा सातवां जोधपुर में है।
फुटवियर इंस्टीटय़ूट में प्रवेश के लिए नवयुवक गण लालायित रहते है क्यों कि इसमें एडमिशन का मतलब नौकरी की पक्की गांरटी, इसके इंस्टीटय़ूट में पढ़ाई खत्म होते ही केंपस सलेक्शन हो जाता है। इसमें पढ़ने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रवेश परीक्षा देना पड़ती है। ऐसा इंस्टीटय़ूट छिंदवाड़ा में लाकर कमलनाथ ने छिंदवाड़ा का मान व महत्व बढ़ाया है।
एफ.डी.डी.आई. छिंदवाड़ा का शुभारंभ सन् 2010 से हुआ है। तथा वर्तमान में यहां पर देश के 232 अध्ययनरत है। एफ.डी.डी.आई का पहला बैच मई 2012 में निकला। तथा 2013 में इस संस्थान से पास होकर विभिन्न कंपनियों मे जॉब पाने वाले विद्यार्थियों में छिंदवाड़ा के भी युवा व युवतियां सम्मिलित है।

मोटर चालन स्कूल छिंदवाड़ा
यह कमलनाथ की अनूठी विशेषता है और छिंदवाड़ा के प्रति उनका लगाव है कि वे केंद्रीय मंत्री मंडल में जिस भी विभाग के प्रभार में रहे हो उस विभाग की कौनसी ऐसी योजना है?
जो छिंदवाड़ा में लागू करवाई जा सकें, उसे तत्काल जिले में लागू करवाने का जतन करते है, ऐसी ही एक योजना भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए प्रशिक्षित चालक तैयार करने के लिए प्राइवेट पब्लिक सेक्टर में प्रशिक्षण स्कूल खोलने की है।
कमलनाथ के प्रयासों से देश की प्रसिद्ध अशोक लीलैण्ड ट्रक कंपनी ने छिंदवाड़ा के समीप लिंगा के पास चालक प्रशिक्षण स्कूल खोला है, इस स्कूल के लिए केंद्र सरकार द्वारा 15 करोड़ रूपये निवेश किये गये है। जब कमलनाथ इस स्कूल का शिलान्यास कर रहें थे, तब कई प्रबुद्ध जनो के मन में यह सवाल उठ रहा था कि आखिर यह स्कूल ही क्यों खुलवा रहे है कमलनाथ?
तब सहजता से जबाव मिला था कि रोजगार के लिए। किंतु उधेड़ बुन लगी रही और अब जाकर पता लगा कि देश में चालकों की कमी के कारण तकरीबन 90 लाख ट्रक में से प्रतिदिन 23 लाख ट्रक का परिचालन नहीं होता है। और ये सड़क किनारे या डिपो में खड़े रहते है।
(भारतीय उद्योग परिसंघ की रिपोर्ट 2012) और कमलनाथ की सोच यह है कि छिंदवाड़ा के वे युवा जो ड्राईविंग को अपनी रोजी रोटी का माध्यम बनाना चाहते है उनके लिए ट्रेनिंग का एक संस्थान, एक स्कूल हो जहां से ट्रेन्ड होकर प्रमाण पत्र लेकर वे गर्व से ड्रायविंग को अपना पेशा (रोजगार) बना सके और अच्छा वेतन व भत्ते पा सके। इस ड्रायविंग स्कूल का कमलनाथ के द्वारा दिनांक 18 फरवरी 2013 को उद्घाटन किया गया।

मजदूरों एवं रोजगार के लिए सार्थक भूमिका
सन 1975-76 में कोल इंडिया ने डब्ल्यू सी एल के तत्वाधान में विश्रामपुर में एक रीजनल इंस्टीटय़ूट माइनिंग इंजीनियर तैयार करने के लिए खोला था, इसका काफी प्रचार-प्रसार किया गया था। महाप्रबंधक द्वारा अग्रेसित छात्र ही यहां प्रवेश पा सकते थे। डब्ल्यूसीएल के अन्य क्षेत्रों की तुलना में पपाथरखेड़ा क्षेत्र के बहुत से छात्रों ने यहां प्रवेश लिया था। सन 1981-82 तक यहां से छात्रों के 3-4 बैच निकल चुके थे किंतु इस इंस्टीटय़ूट को मध्यप्रदेश टेक्नीकल बोर्ड ने मान्यता नहीं दा् थी। इससे इस इंस्टीटय़ूट से निकले छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया था। यहां से निकले छात्रों ने काफी प्रयास किया कि विश्रामपुर इंस्टीटय़ूट को प्रदेश सरकार से मान्यता मिल जाए, किंतु उन्हें सफलता नहीं मिली तब उन्होंने कमलनाथ का अपना दुखड़ा सुनाया तो कमलनाथ ने केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय से विश्रामपुर इंस्टीटय़ूट को मान्यता दिलवाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनवाई, उसके प्रतिवेदन पर भारत सरकार ने पूर्व तिथि के आधार पर उसे मान्यता दे दी। इसी आधार पर कमलनाथ ने मध्यप्रदेश सरकारके टेक्नीकल बोर्ड से भी मान्यता दिलवाई। फलस्वरूप डीजेएमएस ने भी ओवरमेन पद के लिए आईटीआई डिप्लोमा को मान्यता दे दी। आज पेंच कन्हान के बहुत से ओवरमेन इसी संस्थान के डिप्लोमाधारी है।

छिंदवाड़ा की छोटी रेल लाईन को ब्राडगेज में बदलने का सराहनीय प्रयास
सन 1905 में ब्रिटिश सरकार द्वारा डाली गई छोटी रेल लाइनों में से परासिया का रेलवे ट्रेक तो ब्राड-गेज में बदल गया वहीं नागपुर की नेरोगेज भी अपने अंतिम पड़ाव में है, इसी के साथ छिंदवाड़ा-नैनपुर छोटी रेल लाईन के अमान परिवर्तन, (छोटी रेल पटरी को बड़ी रेल पटरी में बदलने का कार्य) के कार्य को कमलनाथ रेल बजट 2009-10 में स्वीकृत करा चुके है। तथा रेल मंत्रालय द्वारा तेजी से इस दिशा में कार्य किए जा रहे है। हालांकि रेल मंत्रालय को छिंदवाड़ा से लेकर सिवनी तक अमान परिवर्तन के लिए पर्यावरणीय या भूमि प्राप्त करने में किसी प्रकार की दिक्कतें नहीं आई है, परंतु सिवनी से नैनपुर के बीच वनभूमि का मामला सिवनी से आगे अमान परिवर्तन के मामले को कुछ लंबा खींच सकता है, किंतु आने वाले वर्षो में छिंदवाड़ा से छोटी रेल लाइन का सफर इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा।
यह कमलनाथ के नेतृत्व और कार्य क्षमता का नतीजा ही है, जिसने वर्षो से जारी रेलवे के पिछड़ेपन को कुछ ही सालों में समाप्त कर छिंदवाड़ा को एक प्रगतिशील व विकास की ओर दौड़ता जिला बन गया है। यातायात के साधन के रूप में छिंदवाड़ा का उत्तरीय क्षेत्र हर्रई व अमरवाड़ा अभी रेल सेवाओं से वंचित है, किंतु कमलनाथ की नजरों से वह क्षेत्र ओझल नहीं है। उस क्षेत्र में रेल की पटरी बिछाने के लिए कमलनाथ ने खजुराहों-सागर से नरसिंहपुर हर्रई, अमरवाड़ा के रेल बजट में ही करवा ली है। निश्चित रूप से यह कार्य भी आज नहीं तो कल शुरू होगा तब छिंदवाड़ा उत्तर व दक्षिण को जोड़ने वाला जंक्शन और ट्रेनों की लगातार आवाजाही वाला स्टेशन होगा।

छिंदवाड़ा में रेल सुविधाओं के विस्तार के सारथी बने कमलनाथ
सन 1979 के लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा से निर्वाचन के पश्चात जो सबसे बड़ी जनापेक्षा पूरी करने की चुनौती कमलनाथ को मिली थी वह थी छिंदवाड़ा की छोटी रेल लाइन को बड़ी रेल लाइन में बदलने की वर्षो पुरानी मांग को पूरा करना, पांढुर्णा स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के रूकने की संख्या में वृद्धि करवाना तथा परासिया रेलवे स्टेशन में ट्रेन सुविधाओं का विस्तार करवाना। सर्व प्रथम कमलनाथ ने पांढुर्ना रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनें के स्टापेज के लिए प्रयास शुरू किए, किंतु रेल मंत्रालय के अधिकारियें द्वारा समय का नुकसान, स्टेशन से टिकटों की बिक्री का आकलन को लेकर सवाल उठा कर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जाती रही किंतु यह कमलनाथ का ही जिगर था कि वे हर तरह की कोशिश करते रहे और एक के बाद एक 16 एक्सप्रेस ट्रेनों के स्टापेज पांढुर्ना रेलवे स्टेशन में बनते चले गए। वहीं संतरा उत्पादक किसानों और व्यापारियों के लिए देश के विभिन्न स्थानों में संतरा भिजवाने के लिए बीपी बैगन उपलब्ध करवाई तथा किराए में चालीस प्रतिशत की छूट भी दिलवाई। साथ ही दादा जी भक्तों की मांग पर नागपुर-खंडवा वाया पाढुंर्णा ट्रेन शुरु करवाई। इसी के साथ उन्होंने परासिया से आमला जाने वाली पेंचवेली पैंसेजर ट्रेन को राजधानी भोपाल तक बढ़वाई ताकि जिले के लोगों को सड़क मार्ग के अलावा ट्रेन के रूप में सस्ता परिवहन साधन राजधानी और आगे के लिए उपलब्ध हो जाए। किंतु छिंदवाड़ा जैसे रेल परिवहन में पिछड़े जिले के लिए बड़ी रेल लाइन की मांग प्रभावी रूप से रख कर रेल मंत्रालय से लेकर योजना आयोग में बैठे खुर्राट वरिष्ठ अधिकारियों के सामने प्रस्ताव पर विचार करने को मजबूर करने की नैतिक ताकत अभी तक केवल कमलनाथ ने ही दिखलाई थी।

परासिया से छिंदवाड़ा बड़ी रेल लाइन के लिए कमलनाथ का अविस्मरणीय योगदान
सन 1991 में जब कमलनाथ केंद्रीय मंत्री मंडल में पहली बार मंत्री के रूप में सम्मिलित किए गए तब उन्होंने छिंदवाड़ा-परासिया बड़ी रेल लाइन परियोजना के लिए रेल व योजना आयोग के सदस्यों को सुझाव दिया कि इस परियोजना में मात्र 27 किलोमीटर रेल लाइन को ही बड़ी रेल लाइन में बदला जाना है तो क्यों न रेलवे की उपयोगकी गई रेल (पटरी) में से अच्छी रेल पटरियां व स्लीपर की छटाई करवा कर 27 किलोमीटर के लिए मटेरियल एकत्र कर इसका उपयोग किया जाए।
तथा बहुत जरूरी निर्माण कार्यो के लिए धनराशि दी जाए। यह ऐसा सुझाव था जिस पर असहमति का प्रश्न ही नहीं उठता था? और प्रायोगिक तौर पर कम लागत के इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी 1993 में मिली। और 1994 में इसका काम शुरू हुआ तथा 1996 में छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय बड़ी रेल लाइन से जुड़ गया तथा यहां से भोपाल के लिए ट्रेन चलने लगी। बाद में उसे इंदौर तक बढ़ा दिया गया। इतना ही नहीं बल्कि परासिया-छिंदवाड़ा ब्राडगेज प्रोजेक्ट में जो राशि बची थी उसे कमलनाथ ने वापस जाने नहीं दिया, उस राशि से उन्होंने छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन से लगे हुए क्षेत्र में गुड्स अनलोडिंग सेंटर (माल धक्का गोदाम) विकसित करवा दिया। ताकि माल गाड़ियों से सामान की लदाई व उतराई के लिए अलग से प्लेटफार्म बन जाए जो यात्री प्लेटफार्म से दूर हो और छिंदवाड़ा में बड़ी रेल लाइन स्टेशन पर माल धक्का विकसित हो जाने से देश के किसी भी कोने से माल गाड़ियां छिंदवाड़ा आ सकें। इससे रेलवे को भी फायदा हुआ और छिंदवाड़ा स्टेशन में माल गाड़ियों का आना-जाना सतत शुरू हो पाया।

छिंदवाड़ा से नागपुर ब्राड-गेज प्रोजेक्ट की शुरूआत
देश के बड़े रेल लाइन नक्शे में छिंदवाड़ा को सम्मिलित करवाने के बाद कमलनाथ ने छिंदवाड़ा से नागपुर ब्राड-गेज प्रोजेक्ट को वास्तविकता के धरातल में उतारने के प्रयास शुरू किए हालांकि कमलनाथ ने ब्राड-गेज प्रोजेक्ट पूर्व से ही परासिया-छिंदवाड़ा-नागपुर के नाम से ही स्वीकृत करवाया था। इसलिए ब्राड-गेज फेज-2 के रूप में छिंदवाड़ा-नागपुर प्रोजेक्ट की शुरूआत 14 मई 2005 को तत्कालीन रेल मंत्री लालूप्रसाद यादव के हस्ते करवाया। छिंदवाड़ा-नागपुर के बीच छोटी रेल लाइन की 149.52 किलोमीटर रेल पटरी बदलने का कार्य तेजी से चल रहा है, किंतु रेलवे के इंजीनियरों को सर्वाधिक कठिनाई सिल्लेवानी के घाट सेक्शन में आ रही है, जहां ब्राडगेज के अनुकुल पटरी डालने का कार्य बड़ी सूझबूझ से किया जा रहा है।
इससे दी गई समयसीमा से अधिक समय इस कार्य को पूर्ण करने में लग सकता है।

छिंदवाड़ा से झांसी व ग्वालियर के लिए सप्ताह में दो दिन एक्सप्रेस की शुरूआत
कमलनाथ जी ने जब छिंदवाड़ा से झांसी के लिए सप्ताह में दो दिन एक्सप्रेस की शुरूआत 13 अक्टूबर 2009 को करवाई थी तो किसी को यह आभास नहीं था कि यह छिंदवाड़ा को नई दिल्ली से जोड़ने का पहला कदम था और हुआ भी यहीं, इस एक्सप्रेस के बाद 14 अगस्त 2010 को ग्वालियर एक्सप्रेस की शुरूआत हुई। तथा इन एक्सप्रेस ट्रेनों को मिले रिस्पांस से छिंदवाड़ा से नई दिल्ली ट्रेन को चलाने का रास्ता साफ हो गया था।

छिंदवाड़ा से सराय रोहिल्ला (नई दिल्ली) एक्सप्रेस ट्रेन

जिस प्रशिक्षित सुविधा का इंतजार छिंदवाड़ा की जनता मन ही मन कर रही थी, वह सुविधा भी छिंदवाड़ा से सराय रोहिल्ला (नई दिल्ली) ट्रेन के रूप मं 3 सितंबर 2012 को तत्कालीन रेलमंत्री मुकुलराय की उपस्थिति में कमलनाथ ने हरी झंडी दिखलाकर सौंप दिया। यह टेन पतालकोट एक्सप्रेस के रूप में नियमित रूप से छिंदवाड़ा से दिल्ली प्रतिदिन चल रही है।

छिंदवाड़ा में 3 मॉडल रेल्वे स्टेशन
छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय के रेलवे स्टेशन सहित जिले के परासिया व जुन्नारदेव स्टेशनों में आधुनिक सुविधाएं नागरिकों को उपलब्ध कराने के मकसद से कमलनाथ ने एक के बाद पहले छिंदवाड़ा फिर परासिया और जुन्नारदेव को मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित करने की स्वीकृति रेल मंत्रालय से करवा दी है, छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन के लिए 80 लाख रूपए रेल मंत्रालय ने स्वीकृत किए है। यह संयोग ही है कि छिंदवाड़ा से आमला रेल ट्रेक के बीच तीनों महत्वपूर्ण रेल स्टेशन मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित हो जायेगें। तथा 1 मार्च 2014 को छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन व 2 मार्च को परासिया रेलवे स्टेशन को अपने आदर्श रूप में कमलनाथ ने जनता को समर्पित कर दिया है।

रेलवे ट्रेक का विद्युतीकरण
कमलनाथ की अग्रिम और आधुनिक सोच का ही परिणाम है कि उन्होंने आमला से लेकर छिंदवाड़ा होते हुए नागपुर तक की निर्माणा धीन ब्राड-गेज रेल लाइन के लिए विद्युतिकरण परियोजना की सन 2012-13 के रेल बजट में ही स्वीकृति करवा दी तथा परासिया में 3 सितंबर 2012 को तत्कालीन रेल मंत्री मुकुल राय के द्वारा भूमि पूजन करवा दिया। ताकि आमला की ओर से विद्युतिकरण का कार्य जब तक जुन्नारदेव होते हुए परासिया और फिर छिंदवाड़ा पहुंचेगा। तब तक छिंदवाड़ा से नागपुर के ब्राड-गेज कार्य भी पूर्ण हो चुका होगा। तब उसका विद्युतीकरण कार्य भी आसानी से किया जा सकेगा।
रेलवे ट्रेक का विद्युतीकरण कराया जाना इसलिए आवश्यक हो गया है, क्योंकि सिल्लेवानी के घाट पोर्शन में बिना विद्युतीकरण किए रेल ट्रेक पर गाड़ियों का परिचालन डीजल इंजिनों से करवाना रोज नई-नई समस्याएं खड़ा करता और भविष्य में छिंदवाड़ा में भोपाल या नागपुर की ओर से एक्सप्रेस ट्रेनों का आना जाना संभव नहीं हो पाता क्योंकि एक्सप्रेस ट्रेनों में विद्युतीकरण इंजन ही लगा करते है। और विद्युतीकरण ट्रेक पर ट्रेन अपेक्षाकृत कम समय परज्यादा दूरी तय कर लेती है। साथ ही कमलनाथ के मन में यह सपना भी है कि छिंदवाड़ा-नागपुर ब्राडगेज बन जाने के बाद छिंदवाड़ा स्टेशन से नई दिल्ली ट्रेन की तरह और भी कई ट्रेन महानगरों के लिए चलना शुरू हो सकें । ताकि रेलवे के इनसे संबंधित वर्कशॉप और कार्यालयों की शुरूआत छिंदवाड़ा में हो सके जिससे प्रत्यक्ष व परोक्ष रोजगार भी जिले में आएं।

लाखों से करोड़ों में पहुंची रेल्वे की आय छिंदवाड़ा से
कमलनाथ के साहसिक प्रयासों से साकार हुई छिंदवाड़ा ब्राडगेज और छिंदवाड़ा स्टेशन ने रेलवे को करोड़ों की सालाना आय देना शुरू कर दिया है। सन 2010-2011में छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन में टिकटों से दैनिक आय लगभग 97175 रूपयों की और माल यातायात से प्रति माह औसत 18, लाख 58931 रूपयों की आय हुई है थी। वहीं सन 2011-12 में टिकटों की बिक्री से रेलवे ने करोड़ों रूपयों की रिकार्ड आय अर्जित की है। इस वर्ष में 7 करोड़ 32 लाख 39 हजार 678 रूपयों की आय हुई है। इस अवधि में 28 हजार 7 सौ 27 टन पार्सल का लदान किया गया तथा 3.99 मैट्रिक टन माल का लदान किया गया, जिससे 1.88.01 करोड़ रूपयों की आय हुई। छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन से रिजर्वेशन टिकटों की बिक्री से प्रतिदिन औसतन 1 लाख रूपयों से ज्यादा की आय हुई है।